मरुस्थली का अंतिम रक्षक
जहरीली रेत के तूफानों और विनष्ट खंडहरों से घिरे पुराने मंदिर शहर कलकीपुरम में, एक अनाथ खोजकर्ता आर्यव जीवनरक्षक बीजों का पता लगाता है जो उजड़ी धरती को पुनर्जीवित कर सकते हैं। लेकिन जब एक निर्मम युद्धदल उसके गाँव पर हमला करता है, तो आर्यव को उन बीजों को एक सुरक्षित अंतिम शरणस्थल तक ले जाना होता है। एक ऐसी दौड़ शुरू होती है जहाँ हर कदम पर धोखा और मृत्यु मौजूद है, और यह भरोसा करना खतरनाक है कि वह अपने साथियों पर भरोसा कर सकता है या नहीं।
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