काले परछाई का शहर
1947 के धुंधले मुंबई में, निजी जासूस विक्रम ठाकुर एक हत्या के मृत शरीर से एक अजीब पुरानी ताबीज खोज निकालता है। जैसे ही वह उस ताबीज को छूता है, शहर की धुंध में छिपे अलौकिक और अन्धकारमयी रहस्य उसे घेरने लगते हैं, और विक्रम को अपनी जान बचाने के लिए भेदभाव और जादू-टोने के अंधियारे रास्तों से गुजरना पड़ता है।
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